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UGC ने बदले पीएचडी के नियम, शोध पत्रों की अनिवार्यता खत्म

डॉ. इन्द्रेश मिश्रा (आरएनए डेस्क, नई दिल्ली)-पीएचडी करने या प्रवेश लेने के इच्छुक छात्रों के लिए अच्छी खबर है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने पीएचडी के नियमों में शोध पत्रों के संदर्भ में बहुत बड़ा फेरबदल किया है।
परिवर्तित किये गये नियम की जानकारी को UGC की वेबसाइट ugc.ac.in पर नोटिफिकेशन के जरिये जारी भी कर दिया गया है।

इस नियम के अनुसार अब पीएचडी थीसिस सबमिशन से पहले जर्नल्स में शोध पत्र को प्रकाशित कराने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है।
इसके लिए यूजीसी ने चार सदस्यों की एक कमेटी बनाई थी, जिसके अध्यक्ष IISc Bengaluru के पूर्व निदेशक पी बलराम थे। इस कमेटी ने जर्नल्स में रिसर्च पेपर पब्लिश करना या कॉन्फ्रेंस में प्रजेंट करना अनिवार्य नहीं होना चाहिए। इसे किसी भी तरह से एकेडमिक क्रेडिट के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।
इस नियम के पहले तक UGC PhD Rules के अनुसार एमफिल धारक छात्रों के लिए कम से कम एक शोधपत्र कॉन्फ्रेंस में प्रस्तुत करना जरूरी हुआ करता था। वहीं पीएचडी छात्रों के लिए उनके PhD Thesis Submission से पहले कम से कम दो शोधपत्र कॉन्फ्रेंस या सेमिनार में प्रस्तुत करना और कम से कम एक रिसर्च पेपर किसी रेफर्ड जर्नल में प्रकाशित कराना अनिवार्य होता था।
जानें, UGC ने क्यों परिवर्तित किया है यह नियम?
यूजीसी के अध्यक्ष एम जगदीश कुमार के अनुसार- “पीएचडी गाइडलाइंस में ये बदलाव करके हमने इस बात पर मुहर लगाने की कोशिश की है कि ‘One Size Fits All’ का अप्रोच जरूरी नहीं है. हर सब्जेक्ट/ संकाय में को एक नजर से देखना और उनके लिए एक समान अप्रोच रखना खत्म करने की जरूरत है. कंप्यूटर साइंस में पीएचडी कर रहे कई स्कॉलर अपने रिसर्च पेपर बजाय Journals में पब्लिश करने के, कॉन्फ्रेंस में प्रजेंट करना पसंद करते हैं।”
Thesis Submission से पहले कम से कम दो शोधपत्र कॉन्फ्रेंस या सेमिनार में प्रजेंट करना और कम से कम एक रिसर्च पेपर किसी रेफर्ड जर्नल में प्रकाशित कराना अनिवार्य होता था।

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