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“एआई संचालित सतत विकास” विषय पर 43वां राष्ट्रीय सम्मेलन टेक्निया इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज में सफलतापूर्वक आयोजित

“एआई संचालित सतत विकास” विषय पर 43वां राष्ट्रीय सम्मेलन टेक्निया इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज में सफलतापूर्वक आयोजित प्रबंधन अध्ययन विभाग द्वारा “एआई संचालित सतत विकास: मानव उन्नति हेतु संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों, प्रबंधन विषयों एवं मनोवैज्ञानिक विज्ञानों का एकीकरण” विषय पर 43वां राष्ट्रीय सम्मेलन दिनांक 25 अप्रैल 2026 को सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।

इस सम्मेलन में देशभर से प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों एवं शोधार्थियों ने भाग लिया और सतत विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रतिभागियों के पंजीकरण के साथ हुआ, जिसके पश्चात भव्य उद्घाटन सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जो ज्ञान और प्रगति का प्रतीक है।

सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन डॉ. एम.एन. झा (डीन अकादमिक्स) के स्वागत भाषण एवं डॉ. अजय कुमार (निदेशक) के उद्घाटन वक्तव्य से हुआ। इस अवसर पर डॉ. संध्या बिंदल (उपाध्यक्ष, टेक्निया ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस) का नेतृत्व संदेश भी अत्यंत प्रेरणादायक रहा। उन्होंने कहा “शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना भी है। ऐसे राष्ट्रीय सम्मेलन छात्रों और शोधार्थियों को नए दृष्टिकोण प्रदान करते हैं, जो राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”

डॉ. अजय कुमार, निदेशक, टेक्निया इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज ने अपने संबोधन में कहा,
“कृत्रिम बुद्धिमत्ता आज के समय में केवल एक तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि सतत विकास का एक सशक्त माध्यम बन चुकी है। शिक्षा, प्रबंधन और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में एआई का समुचित उपयोग हमें संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा सकता है। ऐसे सम्मेलन ज्ञान के आदान-प्रदान के साथ-साथ नवाचार को भी प्रोत्साहित करते हैं।”

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण सम्मेलन कार्यवाही (Proceedings) का विमोचन रहा। इसके पश्चात विशिष्ट अतिथियों ने अपने विचार साझा किए। डॉ. सुमनजीत सिंह (दिल्ली विश्वविद्यालय) ने महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत किए, जबकि मुख्य वक्ता डॉ. बुद्ध चंद्रशेखर (AICTE) ने अपने संबोधन में सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की परिवर्तनकारी भूमिका को रेखांकित किया। डॉ. चंद्रशेखर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा,“एआई आधारित समाधान वैश्विक चुनौतियों—जैसे जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और संसाधनों के कुशल उपयोग—का प्रभावी समाधान प्रदान कर सकते हैं। भारत के युवा शोधार्थियों और शिक्षाविदों को चाहिए कि वे एआई को मानव-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ अपनाएं, ताकि एक समावेशी और टिकाऊ भविष्य का निर्माण किया जा सके।”

सम्मेलन के अंतर्गत विभिन्न तकनीकी सत्र एवं पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं, जिनमें प्रमुख विषय शामिल रहे, एआई और न्यू इंडिया – विज़न 2047,एआई और विकसित भारत @2047, शोध पत्र प्रस्तुतियाँ (ऑफलाइन एवं ऑनलाइन), इन सत्रों में प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई तथा नवीन विचारों का सार्थक आदान-प्रदान हुआ।

कार्यक्रम के दौरान आयोजित लंच सत्र ने प्रतिभागियों को आपसी संवाद एवं नेटवर्किंग का अवसर प्रदान किया। सम्मेलन का समापन समापन सत्र (Valedictory Session) के साथ हुआ, जिसमें सभी प्रतिभागियों, संयोजकों एवं आयोजन टीम के प्रयासों की सराहना की गई। डॉ. पूजा शर्मा, विभागाध्यक्ष, प्रबंधन अध्ययन विभाग ने कहा,“ऐसे राष्ट्रीय सम्मेलन छात्रों और शोधार्थियों को समकालीन विषयों पर गहन समझ विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं। एआई और सतत विकास जैसे विषयों पर संवाद भविष्य के लिए नवाचार और शोध को नई दिशा देता है। यह सम्मेलन अपने उद्देश्यों की सफलतापूर्वक पूर्ति करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सतत विकास एवं मानव उन्नति के समन्वय पर एक सशक्त संवाद स्थापित करने में सफल रहा, जो भविष्य के भारत और विश्व के विकास के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा।

 

 

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