राष्ट्रीय

उत्तर प्रदेश- मुख्यमंत्री ने किया महाकुंभ 2025 पर आधारित पुस्तक ‘सनातन का महाकुंभ’ का विमोचन

महाकुंभ 2025 का जीवंत दस्तावेज है ‘सनातन का महाकुंभ’

विश्व के सबसे विराट धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन महाकुंभ 2025 पर आधारित पुस्तक ‘सनातन का महाकुंभ’ का विमोचन 8 जनवरी को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर किया। अमर उजाला के समाचार संपादक एवं लेखक नीरज मिश्र द्वारा लिखित यह पुस्तक महाकुंभ के धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक आयामों का प्रत्यक्ष अनुभवों के आधार पर किया गया प्रामाणिक दस्तावेज मानी जा रही है।
नीरज मिश्र स्वयं महाकुंभ क्षेत्र में 48 दिनों तक रहे। इस दौरान उन्होंने साधु-संतों, श्रद्धालुओं, अखाड़ों, परंपराओं और विशाल प्रशासनिक व्यवस्थाओं को बेहद निकट से देखा और समझा। पुस्तक में संगम स्नान, अखाड़ों की परंपरा, नागा साधुओं का जीवन, कल्पवास, श्रद्धालुओं की आस्था और आधुनिक प्रबंधन व्यवस्था का विस्तार से वर्णन किया गया है। लेखक नीरज मिश्र के अनुसार, यह पुस्तक केवल आयोजन का विवरण नहीं, बल्कि एक पत्रकार की दृष्टि से देखा गया महाकुंभ है—जहां आस्था, अनुशासन, अव्यवस्था, प्रशासन और अध्यात्म एक साथ दिखाई देते हैं। ‘सनातन का महाकुंभ’ शोधार्थियों, पत्रकारों, प्रशासनिक अधिकारियों और सनातन संस्कृति में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए एक संदर्भ ग्रंथ के रूप में देखी जा रही है।
महाकुंभ 2025 पर आधारित पुस्तक ‘सनातन का महाकुंभ’ को न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक सराहना मिल रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 8 जनवरी को लखनऊ में विमोचित इस पुस्तक की प्रशंसा अब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भारत सरकार के सूचना आयुक्त आशुतोष चतुर्वेदी ने भी की है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि ‘सनातन का महाकुंभ’ केवल एक धार्मिक आयोजन का विवरण नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति, भारतीय परंपराओं और सामाजिक समरसता का प्रामाणिक दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि महाकुंभ जैसे विराट आयोजन को प्रत्यक्ष अनुभवों के आधार पर पुस्तक रूप में संकलित करना एक महत्वपूर्ण कार्य है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए संदर्भ बनेगा। मुख्यमंत्री धामी ने इसे भारत की आध्यात्मिक विरासत को समझने के लिए उपयोगी कृति बताया।


वहीं भारत सरकार के सूचना आयुक्त आशुतोष चतुर्वेदी ने पुस्तक को समकालीन भारत की सांस्कृतिक चेतना का दर्पण बताया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक एक पत्रकार की निष्पक्ष दृष्टि से लिखी गई है, जिसमें आस्था, प्रशासन, सामाजिक व्यवहार और आध्यात्मिक अनुशासन—सभी पहलुओं का संतुलित और तथ्यपरक चित्रण किया गया है। उनके अनुसार, ‘सनातन का महाकुंभ’ शोधार्थियों, मीडिया जगत और नीति-निर्माताओं के लिए भी उपयोगी संदर्भ ग्रंथ है।

इस पुस्तक की भूमिका राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश तथा परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती द्वारा लिखी गई है। दोनों ही विद्वानों ने पुस्तक को सनातन संस्कृति, भारतीय चेतना और सामाजिक समरसता का महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *