
देहरादून (29 दिसंबर), दून विश्वविद्यालय में षष्टम दीक्षांत समारोह माननीय कुलाधिपति एवं राज्यपाल, उत्तराखंड लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित किया गया। दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि, आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर गणेश रामकृष्णन, जो भारत की पहली संप्रभु एआई पहल ‘भारतजेन एआई’ के प्रमुख हैं, ने दीक्षांत संबोधन दिया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत उपस्थित रहे।

दीक्षांत समारोह में अपने-अपने पाठ्यक्रमों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने वाले 42 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। समारोह में शैक्षणिक शोभायात्रा का नेतृत्व विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री दुर्गेश डिमरी ने किया। समारोह का शुभारंभ माननीय कुलाधिपति एवं सम्मानित अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ, इसके पश्चात विश्वविद्यालय कुलगीत का गायन किया गया। माननीय कुलाधिपति ने छठे दीक्षांत समारोह की औपचारिक घोषणा की। कुलपति प्रो. सुरेखा डांगवाल ने वर्ष 2025 में स्नातक होने वाले 484 स्नातक, 241 स्नातकोत्तर तथा 13 शोधार्थियों को पीएच.डी. उपाधियाँ प्रदान कीं। इसके अतिरिक्त, माननीय कुलाधिपति ने विश्वविद्यालय के पाँच पूर्व छात्रों को उनके-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए “विशिष्ट पूर्व छात्र” सम्मान से सम्मानित किया। सम्मानित होने वाले पूर्व छात्र हैं— नितेश भारद्वाज, अरुण ठाकुर, डॉ. अक्षय वर्मा, चारु नेगी एवं नैन्सी थपलियाल।

इसके अलावा, स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज के एक वीर छात्र अग्रांशु ग्रोवर को “नागरिक कर्तव्य सम्मान” प्रदान किया गया। दो विद्यार्थियों— जया शर्मा एवं स्वास्तिक गोंधी—को उनके सर्वांगीण उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए “प्रो. गजेन्द्र सिंह ऑल राउंड बेस्ट स्टूडेंट अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया। साथ ही, दो विद्यार्थियों – डा. शिवांकुर थपलियाल, अंशी कोठारी को “कुलाधिपति फ्यूचर ए.आई. अवॉर्ड” प्रदान किया गया।
माननीय राज्यपाल एंव कुलाधिपति(ले.जे.)श्री गुरमीत सिंह ने स्नातक विद्यार्थियों को बधाई देते हुए विश्वविद्यालय की प्रगति के लिए कुलपति के गतिशील नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता विकसित भारत के निर्माण के लिए एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी है और इस क्षेत्र में भारत निरंतर नेतृत्व स्थापित कर रहा है। उन्होंने उन्नत तकनीक को जनभाषाओं और जन-आवश्यकताओं से जोड़ने के लिए प्रो. गणेश रामकृष्णन के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारतजेन जैसी पहलें संप्रभु और सांस्कृतिक रूप से निहित एआई क्षमताओं के निर्माण के प्रति भारत के संकल्प को दर्शाती हैं। ऐसी नवाचार शिक्षा, स्वास्थ्य और शासन में अंतिम व्यक्ति तक उसकी भाषा में पहुँच बनाकर परिवर्तनकारी भूमिका निभाएँगे। स्नातक विद्यार्थियों से उन्होंने आह्वान किया कि वे इन प्रयासों से प्रेरणा लेकर स्थानीय एवं राष्ट्रीय चुनौतियों के समाधान हेतु एआई आधारित समाधान विकसित करें। उन्होंने कहा कि स्वदेशी एआई समावेशी विकास और राष्ट्र-निर्माण का प्रमुख चालक बनेगा।
मुख्य वक्ता प्रो. गणेश रामकृष्णन ने सभी उपाधिधारकों, स्वर्ण पदक विजेताओं एवं पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं को बधाई दी। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा आकार लिए जा रहे एक नए युग में प्रवेश कर रहा है और भारतजेन मिशन के माध्यम से संप्रभु एआई के निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि भारतजेन, इंडिया एआई मिशन के अंतर्गत ₹988 करोड़ के समर्थन से, देश की तकनीकी, आर्थिक एवं अवसंरचनात्मक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखता है। उन्होंने रक्षा सहित राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता के लिए स्वदेशी बड़े भाषा मॉडल (एलएलएम) के विकास को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने समझाया कि यह पहल व्याख्येय एआई, मॉडल प्रशिक्षण में दक्षता तथा मानव-केंद्रित संरेखण जैसे प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। प्रो. रामकृष्णन ने कृषि, शासन और शिक्षा में—विशेषकर भारतीय भाषाई प्रौद्योगिकियों के माध्यम से—एआई की परिवर्तनकारी भूमिका पर भी प्रकाश डाला। भविष्य की ओर देखते हुए उन्होंने कहा कि भारत को सशक्त मानव पर्यवेक्षण के साथ आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस के उदय के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने निष्कर्षतः कहा कि एआई को सशक्तिकरण और संप्रभुता का उपकरण बनाने के लिए अकादमिक जगत, उद्योग और सरकार के समन्वित “समग्र राष्ट्र” दृष्टिकोण की आवश्यकता है।कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने दीक्षांत समारोह की इस साल की थीम ‘ ए.आई. बाई भारत’ से अवगत कराया। प्रो डंगवाल ने विश्विद्यालय की उपलब्धियों का ब्योरा देते हुए कहा कि हम समाज में विकास एंव समावेशिता में अपने योगदान देने और सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इस ओर हर प्रकार से कार्यरत हैं। इस अवसर पर विश्विद्यालय के सैंटर फाॅर पब्लिक पाॅलिसी द्वारा संपादित पुस्तक ‘संवर्धन – अ रोडमैप फाॅर डेवलपमेंट आॅफ उत्तराखण्ड- विज़न 2025 का विमोचन किया गया।
दीक्षांत समारोह का संचालन प्रो. एच. सी. पुरोहित ने किया। समारोह में विश्वविद्यालय के फैकल्टी सदस्य, विद्यार्थी, पूर्व छात्र, अभिभावक एवं अतिथि उपस्थित रहे, जबकि विश्वविद्यालय के संकाय एवं कर्मचारियों ने गर्वित मेज़बान की भूमिका निभाई।




